क्‍या सच में राजनीति में कोई स्‍थाई दोस्‍त या दुश्‍मन नहीं होता?

कहते हैं राजनीति में न कोई स्‍थाई दोस्‍त होता है, न दुश्‍मन। यहां सब कुछ सिर्फ सत्‍ता का केंद्र ही होता है, चाहे वह दोस्‍ती हो या फिर दुश्‍मनी। बिहार में हालिया घटित राजनीतिक घटनाक्रम इसका ताजा उदाहरण है।
इन दिनों सियासी गलियारों और बुद्धिजीवियों में सबसे ज्‍यादा एक ही बात की चर्चा है कि क्‍या नीतीश का भाजपा के साथ सरकार बनाना उचित है। क्‍या जनता के मतों की कोई कीमत नहीं है। कोई इसे देश और प्रदेश की प्रगति के लिए नीतीश का सही कदम बता रहा है, तो कोई नैतिकता की दुहाई देकर इसे गलत करार दे रहा है। इस राजनीतिक उठापटक को देखकर आपके मन में भी कई तरह के विचार आए होंगे। आपको भी नीतीश का भाजपा के साथ जाना सही या गलत लगा होगा। यह भी हो सकता है कि आपको इतिहास में हुई ऐसी ही कोई दूसरी राजनीतिक घटना याद आ गई हो। तो देर किस बात की, आप अपनी राय, अपने विचार हम  तक पहुंचा सकते हैं।